चलते फिरते
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015
फर्जी दिलासा
किसानों की तबाही भुखमरी आत्महत्याएं एक तरफ और इनका विलाप दूसरी तरफ बेचारा किसान ठगा सा सब देख रहा हे भगवान !
#
रामअनूपद्विवेदी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें