शुक्रवार, 31 अगस्त 2012


बेचारी गौरैया 

प्राणी मात्र से प्रेम का पाठ तो हमें अरसे से पढाया जा रहा है, लेकिन अपने को छोड़ हम बाकी जीवों के प्रति कैसी धारणा रखते हैं, कहने की जरूरत नहीं. पशु पक्षियों के प्रति प्रेम के ढेर सारे नारे हवा में तैरते रहते हैं, लेकिन  वास्तविकता के धरातल पर कुछ सार्थक होता नहीं दिखता.
उलटे हो यह रहा है कि पशु पक्षियों की अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं. ऐसा ही एक नाम है गौरैया का. नन्हीं सी यह चिड़िया अपने चंचल स्वभाव से किसका मन नहीं मोह लेती, लेकिन अब इसका अस्तित्व भी खतरे में है. शहरों में तो इसके दर्शन कम ही होते हैं. कंक्रीट जंगल में वैभवशाली रहनसहन हमें जितना भी सुकून दे पर इन निरीह प्राणियों की जान पर बन आई है, न इनके रहने के लिए घोसलों की जगह बची, न उपयुक्त माहौल ही शेष रहा. कहां दाना चुगे, क्या चुगे गौरैया. कहां जाए कुदरत की यह कृति. हमने अपने महान होने की अनन्त ख्वाहिशों को प्रमाणित करने के लिए एक अदद गौरैया दिवस बना दिया है. मानो उसी से इसका कल्याण हो जाएगा. बहरहाल, यह प्रयास भी बेजा नहीं, बशर्ते कुछ ईमानदार प्रयास हों. होना यह भी चाहिए कि हरेभरे पेड़ न काटे जाएँ, ताकि ये मासूम पक्षी इन पर अपने घोसले बना सकें. अगर कुछ दाने पेड़ों के आसपास डाल दिए जाएं तो इनका पेट भी आसानी से भर जाए. लेकिन ऐसा हममें से से कितने लोग करते हैं.
ग्रामीण परिवेश जरूर कुछ अलग है, जहाँ गौरैया के झुण्ड आज भी मन मोहते हैं. पेड़ों की डालियों पर इनके घोसले देखते ही बनते हैं. इनका फुदकना, एक दाने के लिए इनका मचलना और कोशिश करके उसे हासिल कर्र लेना बरबस ही ध्यान आकर्षित करता है. और हाँ, ये हमारी आपकी घर गृहस्थी से कुछ नहीं चुराती. जो दाने घर बार के आसपास गिरे होते हैं, उन्हीं का सदुपयोग करके ये अपना जीवनयापन मौज से कर लेती हैं. तो क्या हम यह भी नहीं कर सकते कि पेड़ों के आसपास कुछ दाने ही बिखेर दिया करें, किसी टूटे फूटे बर्तन में पानी रख दिया करें. इसमें भला कितना खर्च होगा हमारा. बस इतना सा कर दें तो इस प्राणी का भी जीवनयापन हो जाए. तभी हमारा जीवन भी सार्थक होगा. महज गौरैया दिवस की औपचारिकता से कुछ न होगा.
अभी हाल ही में दिल्ली सरकार ने गौरैया को राज्य पक्षी घोषित किया है. इसके पीछे सरकार की क्या योजना है, यह तो वही जाने पर निर्णय अच्छा है. मेरा तो बस इतना ही कहना है कि यह काम कोई सरकार नहीं कार सकती. हमको आपको ही इसके लिए आगे आना होगा. इसमें कोई मेहनत नहीं है और न ही कोई लागत.

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