रविवार, 9 दिसंबर 2012


जन गण मन : एक नये रिकार्ड की ओर कानपुर


यह शहर कभी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहा जाता था. धीरे धीरे इसकी पहचान एक तबाह होते शहर के रूप में होने लगी. तमाम उद्योगपतियों, नेताओं, साहित्यकारों और सेनानियों को जन्म देने वाला यह शहर गुमनामी के अँधेरे में खोता चला गया. आज यह अपनी पुरानी पहचान के लिए छटपटा रहा है. सच कहूं, यह शहर अब अपने वर्तमान में नहीं, अपने गौरवशाली इतिहास और भविष्य की उम्मीदों के बीच जी रहा है. इसी उधेड़बुन के बीच इस शहर ने नौ दिसंबर को वह कर दिखाया जो बाकी शहर न कर सके. जी हाँ, कानपुर ने अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करने का पुख्ता प्रबंध कर लिया है. यह रिकार्ड होगा सामूहिक राष्ट्रगान का, जो पहले भी कभी भारत के नाम था, फिर उस पर पाकिस्तान का कब्ज़ा हो गया और अब फिर भारत का नाम होगा तो उसके साथ कानपुर जुड़ा रहेगा.
नौ दिसंबर की सुबह लगा जैसे सारा शहर ग्रीनपार्क स्टेडियम की ओर भागा चला जा रहा है. हाथों में तिरंगा लिए भारत माता की जय के नारे लगाती युवाओं, युवतियों, छात्र-छात्राओं, बच्चों-बुजुर्गों के जत्थे सड़कों पर उमड़ पड़े. समूचा स्टेडियम खचाखच भर गया. बहुतेरों को भीतर जाने को जगह न मिली. सुबह 10.20 बजे सबने मिलकर जन गण मन अधिनायक जय हे गाया तो लगा कि शहर जाग गया है. देखते ही बना लोगों का उत्साह. लोगों को न ठंड की परवाह और न किसी काम की फिक्र। सब के सब राष्ट्रगान गाकर पाकिस्तान का रिकार्ड तोड़ने को बेताब थे।
कनपुरियों का यह जूनून रंग लाया और उन्होंने देशभक्ति की अनूठी दास्तान लिख दी। गिनीज बुक आफ व‌र्ल्ड रिकार्ड के प्रतिनिधियों की मानें तो इस आयोजन में 1.12 लाख से अधिक लोग शामिल हुए।
यहाँ यह भी जान लें कि किसी समय सामूहिक रूप से राष्ट्रगान का विश्व रिकार्ड पहले भारत के ही नाम था। तब 15342 लोगों ने राष्ट्रगान गाया था, लेकिन पिछले अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान में 42817 लोगों ने राष्ट्रगान गाकर इस रिकार्ड को तोड़ दिया। बीएस कानपुर को इसी रिकार्ड को तोड़ने की फ़िक्र हो गयी और उसने इसे पूरा भी कर दिखाया. इस आयोजन का आह्वान किया परिवर्तन संस्था ने और सारा शहर इसमें शामिल होने को आतुर हो उठा. इस आयोजन के प्रेक्षकों ने माना है कि इसमें 112172 लोग शामिल हुए. हालांकि अभी कई मानकों पर जांच होनी है। इसके बाद ही एक नये रिकार्ड की घोषणा की जाएगी। निश्चित रूप से यह बड़ी उपलब्धि है.

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