मेरी हिमाचल
यात्रा (2)
अपनी हिमाचल यात्रा
के आखिरी दिन मैं भाखड़ा नंगल की विकास गाथा से रूबरू हुआ. समझ सका कि पंजाब की
हरियाली के पीछे कितनी मेहनत है. सतलज पर बने नंगल बाँध के जरिये निकाली गयी नहरें
इलाके को हरा भरा बनाने में कितना महत्वपूर्ण योगदान है. एक बात और मै सतलज का पानी देखकर भौंचक था. इतना
साफ़ पानी मैंने किसी नदी का नहीं देखा. कई मित्रों से बात की पर संतोषजनक जवाब
नहीं मिला. आज भी जिज्ञासा बनी हुई है. आदरणीय पंडित जनार्दन पाण्डेय शास्त्री जी
ने मुझे नंगल से निकली नहरों के बाद देश के गौरव भाखड़ा का अवलोकन कराया. अभिभूत
हुआ मैं. सीना गर्व से चौड़ा हुआ. विशालकाय पर्वतों के बीच से आगे निकलते हुए जैसे
ही भाखड़ा की झलक मिली, पत्नी बोलीं, वाह ! वे डर भी रहीं थीं. पहाड़ों का ढांचा है ही ऐसा और वे
पहली बार मैदानी क्षेत्र से निकल कर ऐसे परिदृश्य से रूबरू थीं. फिर भाखड़ा जलाशय
के किनारे से गुजरते हुए हम सब नैना देवी मंदिर की ओर बढ़े. वाह! क्या सुंदर दृश्य
है. प्रकृति ने हमे कितना कुछ दिया है, यह बात दुखद है कि हम प्रकृति को सहेज न पाए. खैर, माँ नैना
देवी जिस पर्वत शिखर पर विराजमान हैं वहां पहुंचकर हम अभिभूत थे. रोपवे का सहारा
लिया. कैमरा नहीं था सो मोबाइल से ही तस्वीरें ली. पहाड़ की एक बस्ती का चित्र भी
दाल रहा हूँ. लगा कि कितना कठिन जावं है यहाँ के लोगों का. मन्दिर परिसर में
पहुंचकर साड़ी थकान दूर हो गयी. माँ का दर्शन इतने सहज रूप स सुलभ हुआ कि कह नहीं
सकता. व्यवस्था ने बहुत प्रभावित किया. मेरी कामना है कि माँ बार बार बुलाती रहें.
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| सतलुज का निर्मल पानी |
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| मेरी पोती आकृति जो 15 जुलाई २०१३ को चार साल की हो गयी. |
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| भाखड़ा जलाशय. |
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| रोपवे से नैना देवी मंदिर जाते समय लिया गया आबादी का फोटो. |
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| नैना देवी मंदिर. |
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| माँ नैना देवी का भव्य श्रृंगार. |
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| नगल डैम से निकली नहर. कितना स्वच्छ है पानी. |







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